Saturday, December 29, 2012

जब मै छोटा था Proud Feel करता था I Am Indian, आज शर्म आ रही है। हिन्दुस्तान को गुलामी से आज़ाद कराने वाले महापुरषों, क्रांतिकारियों ने क्या ऐसे भारत की उम्मीद की थी जहाँ जगह जगह शराब के अड्डे हों, लड़के शराब के नशे में धुत्त होकर किसी लड़की जिसके अन्दर एक बहेन का, माँ का , मित्र का , अर्धांगनी का चरित्र है उसकी आबरू से खुलेआम खिलवाड़ करें, घिनौना कर्म करें। आज बलात्कार पीडिता की साँसे टूट चुकी है, आँखें सदा के लिए सो चुकी हैं, सदा के लिए वह इस जालिम समाज से निकलकर एक ऐसी जगह जा चुकी है जहाँ कम से कम उसके साथ कोई अपराध तो नहीं होगा, बस उसकी आत्मा रोएगी तडपेगी उस माँ का प्यार पाने के लिए जिसने उसे जन्म दिया, उस पिता का दुलार पाने को जिसने उसकी ऊँगली थाम उसे चलना सिखाया। झटपटाएगी वो न्याय पाने के लिए। अभी वो जी सकती थी घर बसा सकती थी, चंद लोगों ने उसे जीने नहीं दिया। हार गयी वो मौत से। यह साल हमें बहुत कुछ देकर जा रहा है। बहुत कुछ सिखाकर जा रहा है। एक दर्द भी जो सारी ज़िन्दगी न मिटेगा। खुद को मर्द कहने वाले चंद लोग शर्म आती है मुझे ऐसे लोगों, उनकी मर्दानगी पर जिन्होंने मर्द जात को कलंकित किया। भले ही 2012 के ख़त्म होने में अभी 2 दिन शेष हैं मगर सही मायनो में 2012 का सूर्य सदा सदा के लिए अस्त हो चुका है कुछ शेष नहीं अब। नए साल की खुशियों में ये दास्ताँ न भूल जाना दोस्तों, इस दर्द को भी अपने साथ शरीक करना महसूस करना। take RIP....
उसके माता पिता को हज़ार बेटियों का प्यार मिले, उनका उजड़ा घर फिर तो नहीं बसा सकता बस ये दुआ करता हूँ ईश्वर उन्हें इन कठोर परिस्थितियों से लड़ने का सामर्थ्य दे।
अलविदा 2012 !!   

Thursday, December 20, 2012

इंसान को जानवर कहना उचित नहीं है , इंसान जानवर से भी बत्तर हो चुका है। गैंगरेप जैसी घटनाएं आजकल आम हो चुकी है। राजधानी दिल्ली की चकाचौंध में आये दिन बुरी नियत का शिकार होती लड़कियां सुरक्षा के कड़े इंतजाम होते हुए भी पूरी तरह असुरक्षित हैं उन्ही लोगों के बीच जिनसे वो घिरी है। ऐसी घटनाएं एक दुसरे के प्रति  अविश्वास का रास्ता खोलती हैं। इंसानों की वह्शित्यत दिल दहला देती है, किसी की सरल सहज ज़िन्दगी के बारे में सोचने पर मजबूर करती है। तमाशाई इस दुनिया में करारा तमाचा  सा पड़ता है और अपराधियों को ऐसे घिनौने अपराध करने का  बढ़ावा मिलता है कितना गिर चुका है हमारा समाज जो किसी युवती को दर्दनाक तरीके से हवश की आग में जला देता है छोड़ देता है उसे ज़िन्दगी मौत के बीच तड़पने को, तनिक विचार नहीं करता। नयी नयी तकनीक नयी सोच आज समाज का स्वरूप बदल चुका है लेकिन फिर भी वक़्त के चलते हमारे इसी समाज ने इंसानियत का गला घोंट दिया है। खुद को भारतीय कहकर गर्वान्वित  होता संस्कारों की तिलांजलि दे बैठा है। मनुष्य का जन्म पाकर भी उसका सही अर्थ खो बैठा है। ऐसे अपराधों को अंजाम देने वाले ऐसी घटिया सोंच में पलने वाले लोग दोषी है जिन्होंने इसे गन्दा किया है। गैंग रेप में दोषी उन अपराधियों को उनके शर्मनाक अपराध की सजा मिलनी चाहिए। मगर जब तक युवक या पुरुष लड़कियों या महिलायों के प्रति सम्मान की भावना नहीं रखते। हवश जैसी छोटी सोंच के दायरे से बाहर नहीं निकलते। हम ऐसे अपराधों पर अंकुश नहीं लगा सकते।

~ Prasneet Yadav ~