सफ़र कोई भी हो जनरल डिब्बे जैसा ही तो है। भीड़ से खचाखच भरा हुआ। मंजिल भीड़ से भरी हुई रास्तों पर लम्बी-लम्बी कतारें। पहले स्टूडेंट लाइफ में स्ट्रगल फिर कुछ बनने के लिए कुछ पाने के लिए स्ट्रगल। लाइफ का जनरल डिब्बा बैठना तो दूर खड़ा होना तक दुशवार है। अज़ी दो पैर क्या ? एक पैर तक ज़माना लोहे के चने चबाने जैसा है। बल्कि मै कहूँगा डिब्बे के अन्दर आकर दिखा दो, सर्दी में भी पसीने छूट जायेंगे।
भीड़ देखकर घबराओ नहीं बस डट जाओ। अगले स्टेशन तक अन्दर आ ही जाओगे और एक पैर जमा ही लोगे। धक्का फिर भी लगेगा मगर तुम हौसला मत छोडो जम गए हो तो जमे रहो फिर एक और स्टेशन तुम ठीक-ठाक खड़े हो जाओगे। आगे वाले लोग तुम्हे पीछे करने के लिए बार-बार धक्के पर धक्का देंगे। डरना मत अब तुम गिरोगे नहीं, वो जिस कतार में सबसे पीछे थे तुम अब आगे आ चुके हो। अब तुम्हे कुछ न होगा, भय तो उसे है जो अभी भी बहुत पीछे है। तुम थोड़ा आगे खिसकोगे थोड़ा पीछे। अगले आने वाले २-४ स्टेशन तक बस ये सिलसिला जारी रहेगा आगे-पीछे ,आगे पीछे। तुमने अगर पूरी निर्भयता और ताकत से उस भीड़ का सामना किया तो यकीनन एक स्टेशन ऐसा आएगा जहाँ तुम पूरी स्वतंत्रता खड़े हो जाओगे। यहाँ पर ये मत सोचना की डिब्बा बदल लूँ शायद कहीं बैठने की जगह मिल जाए। तुमने उस वक़्त ऐसा कुछ किया तो सोचो मुसीबतें फिर वही आएँगी जो तुम्हारे सफ़र के पहले स्टेशन से लेकर अब तक आ चुकी है।
तुम्हे ये सब भूल कर अपनी कोशिश जारी रखनी है। क्युकी, कोशिश नहीं करोगे तो वही खड़े रह जाओगे और पीछे वाला तुमसे आगे हो जाएगा। अभी भी शिकारी की तरह सारा ध्यान अपनी मंजिल पर रखो और जैसे ही आगे जगह खाली हो बिना चुके अपने पाँव जमा दो। धीरे-धीरे ट्रेन आगे बढ़ेगी स्टेशन ....स्टेशन फिर स्टेशन आते चले जायेंगे। जो सफ़र तुमने मुसीबतों से शुरू किया था अब आसान हो जाएगा। तुम्हारे निरंतर कोशिशों से एक स्टेशन ऐसा आयेगा जहाँ सीट जरुर खली होगी और तुम झट से वहां बैठ जाओगे। दोस्त उस वक़्त तुम खिड़की से बाहर झांकते हुए बहुत आराम महसूस करोगे। सुकून मिलेगा तुम्हे और आनंद भी। साथ ही साथ पहले स्टेशन के सफ़र से लेकर अब तक के सफ़र में आई सारी कठिनाइयों के बारे में तुम सोचोगे जरुर सोचोगे। फिर स्टेशन आयेंगे ....आयेंगे फिर आयेंगे। वो सारे मुसाफिर जिनको सफ़र नहीं करना एक - एक करके उतर जायेंगे। उस भीड़ से तुम बहुत आगे निकल चुके होगे। तुम्हारे लिए पूरी बर्थ खाली हो जायेगी और उस बर्थ पर तुम पूरे शान से लेट जाओगे जहाँ तक वो ट्रेन जायेगी और महसूस करोगे आई एम द बॉस।
~ Have A Great Day ~
~ Prasneet Yadav ~
भीड़ देखकर घबराओ नहीं बस डट जाओ। अगले स्टेशन तक अन्दर आ ही जाओगे और एक पैर जमा ही लोगे। धक्का फिर भी लगेगा मगर तुम हौसला मत छोडो जम गए हो तो जमे रहो फिर एक और स्टेशन तुम ठीक-ठाक खड़े हो जाओगे। आगे वाले लोग तुम्हे पीछे करने के लिए बार-बार धक्के पर धक्का देंगे। डरना मत अब तुम गिरोगे नहीं, वो जिस कतार में सबसे पीछे थे तुम अब आगे आ चुके हो। अब तुम्हे कुछ न होगा, भय तो उसे है जो अभी भी बहुत पीछे है। तुम थोड़ा आगे खिसकोगे थोड़ा पीछे। अगले आने वाले २-४ स्टेशन तक बस ये सिलसिला जारी रहेगा आगे-पीछे ,आगे पीछे। तुमने अगर पूरी निर्भयता और ताकत से उस भीड़ का सामना किया तो यकीनन एक स्टेशन ऐसा आएगा जहाँ तुम पूरी स्वतंत्रता खड़े हो जाओगे। यहाँ पर ये मत सोचना की डिब्बा बदल लूँ शायद कहीं बैठने की जगह मिल जाए। तुमने उस वक़्त ऐसा कुछ किया तो सोचो मुसीबतें फिर वही आएँगी जो तुम्हारे सफ़र के पहले स्टेशन से लेकर अब तक आ चुकी है।
तुम्हे ये सब भूल कर अपनी कोशिश जारी रखनी है। क्युकी, कोशिश नहीं करोगे तो वही खड़े रह जाओगे और पीछे वाला तुमसे आगे हो जाएगा। अभी भी शिकारी की तरह सारा ध्यान अपनी मंजिल पर रखो और जैसे ही आगे जगह खाली हो बिना चुके अपने पाँव जमा दो। धीरे-धीरे ट्रेन आगे बढ़ेगी स्टेशन ....स्टेशन फिर स्टेशन आते चले जायेंगे। जो सफ़र तुमने मुसीबतों से शुरू किया था अब आसान हो जाएगा। तुम्हारे निरंतर कोशिशों से एक स्टेशन ऐसा आयेगा जहाँ सीट जरुर खली होगी और तुम झट से वहां बैठ जाओगे। दोस्त उस वक़्त तुम खिड़की से बाहर झांकते हुए बहुत आराम महसूस करोगे। सुकून मिलेगा तुम्हे और आनंद भी। साथ ही साथ पहले स्टेशन के सफ़र से लेकर अब तक के सफ़र में आई सारी कठिनाइयों के बारे में तुम सोचोगे जरुर सोचोगे। फिर स्टेशन आयेंगे ....आयेंगे फिर आयेंगे। वो सारे मुसाफिर जिनको सफ़र नहीं करना एक - एक करके उतर जायेंगे। उस भीड़ से तुम बहुत आगे निकल चुके होगे। तुम्हारे लिए पूरी बर्थ खाली हो जायेगी और उस बर्थ पर तुम पूरे शान से लेट जाओगे जहाँ तक वो ट्रेन जायेगी और महसूस करोगे आई एम द बॉस।
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~ Prasneet Yadav ~