हिंदी मेरे देश की हिंदी दिन-दिन घटती जाए ,
हिंदी के इस देश में अंग्रेजी राज़ चलाये ,
अंग्रेजी में होय आरती अब अंग्रेजी के होते बोल,
हिंदी तो बस नाम की हिंदी जिसका न कोई मोल….
तोते रटे रटाये जाते अंग्रेजी सिखलाये जाते ,
ए बी सी डी ई एफ जी बस यही यहाँ बतलाये जाते ,
क्या पढेंगे अब हम क ख ग ?
जब आती हमें शर्म
अंग्रेजी की गरमा गर्मी हिंदी हुई नरम….
हिंदी मेरे देश की हिंदी अपने घाव दिखाए ,
तड़प-तड़प के बोले वो क्या ?
सुनना न चाहे कोई हिंदी ,
कहना न चाहे कोई हिंदी ….
अंग्रेजी की मारा-मारी अंग्रेजी की भागम-भागी
हुए यहाँ गुमराह सभी
हिंदी दिए भुलाए ,
दिए जालाये चौखट पर हिंदी अब इंतज़ार करे ,
हैरान होकर बोले वो कोई तो मुझसे प्यार करे ….
ए बी सी डी ई एफ जी में आया कितना दम ,
हिंदी हुई नरम बाबू हिंदी हुई नरम ,
हिंदी की क्लास से अब बच्चे गायब रहते है ,
आता हमको सब कुछ है बाहर वो ऐसा कहते है….
हिंदी से इतना भाग रहे देखो दुश्मन जाग रहे ,
अंग्रेजी ने मारा सबको अंग्रेजी में ढाला सबको ,
हिंदी हुई हमारी बैरी आती नहीं शर्म ?
हिंदी मेरे देश की हिंदी दिन-दिन मिटती जाए ,
अपनों के हांथों लुटती जाए ….
पराये देशों में पा रही सम्मान ,
अफ़सोस अपने ही देश में मिल रहा अपमान,
क्या लिखकर अब हासिल करे हिंदी का दर्द ?
हिंदी हुई बेवफा सबकी अंग्रेजी बनी सनम….
ए बी सी डी ई एफ जी सर पर इसे बिठाया हमने
चकाचौंध की नगरी में जगह-जगह सजाया हमने,
हमने ही भाव-ताव बढाए इसके ,
अंग्रेजी हिंदी पर भारी इस पर आया बड़ा वजन….
हिंदी मेरे देश की हिंदी ये मुद्दा बड़ा गरम,
कहती हिंदी ऐसा कुछ आई हूँ लौटकर एक आस लगाए बैठी हूँ ,
प्यासी हूँ मै फिर भी प्यास बुझाए बैठी हूँ ,
देखूं मै क्या बोलूं मै क्या ?
यहाँ बोलने वाले कितने मुझे यहाँ जानने वाले कितने,
देखेंगे अंग्रेजी के आगे यहाँ मानने वाले कितने ?
~ प्रसनीत यादव ~
© PRASNEET YADAV
(prasneetyadav.blogspot.in)
20 Sep, 2013
हिंदी के इस देश में अंग्रेजी राज़ चलाये ,
अंग्रेजी में होय आरती अब अंग्रेजी के होते बोल,
हिंदी तो बस नाम की हिंदी जिसका न कोई मोल….
तोते रटे रटाये जाते अंग्रेजी सिखलाये जाते ,
ए बी सी डी ई एफ जी बस यही यहाँ बतलाये जाते ,
क्या पढेंगे अब हम क ख ग ?
जब आती हमें शर्म
अंग्रेजी की गरमा गर्मी हिंदी हुई नरम….
हिंदी मेरे देश की हिंदी अपने घाव दिखाए ,
तड़प-तड़प के बोले वो क्या ?
सुनना न चाहे कोई हिंदी ,
कहना न चाहे कोई हिंदी ….
अंग्रेजी की मारा-मारी अंग्रेजी की भागम-भागी
हुए यहाँ गुमराह सभी
हिंदी दिए भुलाए ,
दिए जालाये चौखट पर हिंदी अब इंतज़ार करे ,
हैरान होकर बोले वो कोई तो मुझसे प्यार करे ….
ए बी सी डी ई एफ जी में आया कितना दम ,
हिंदी हुई नरम बाबू हिंदी हुई नरम ,
हिंदी की क्लास से अब बच्चे गायब रहते है ,
आता हमको सब कुछ है बाहर वो ऐसा कहते है….
हिंदी से इतना भाग रहे देखो दुश्मन जाग रहे ,
अंग्रेजी ने मारा सबको अंग्रेजी में ढाला सबको ,
हिंदी हुई हमारी बैरी आती नहीं शर्म ?
हिंदी मेरे देश की हिंदी दिन-दिन मिटती जाए ,
अपनों के हांथों लुटती जाए ….
पराये देशों में पा रही सम्मान ,
अफ़सोस अपने ही देश में मिल रहा अपमान,
क्या लिखकर अब हासिल करे हिंदी का दर्द ?
हिंदी हुई बेवफा सबकी अंग्रेजी बनी सनम….
ए बी सी डी ई एफ जी सर पर इसे बिठाया हमने
चकाचौंध की नगरी में जगह-जगह सजाया हमने,
हमने ही भाव-ताव बढाए इसके ,
अंग्रेजी हिंदी पर भारी इस पर आया बड़ा वजन….
हिंदी मेरे देश की हिंदी ये मुद्दा बड़ा गरम,
कहती हिंदी ऐसा कुछ आई हूँ लौटकर एक आस लगाए बैठी हूँ ,
प्यासी हूँ मै फिर भी प्यास बुझाए बैठी हूँ ,
देखूं मै क्या बोलूं मै क्या ?
यहाँ बोलने वाले कितने मुझे यहाँ जानने वाले कितने,
देखेंगे अंग्रेजी के आगे यहाँ मानने वाले कितने ?
~ प्रसनीत यादव ~
© PRASNEET YADAV
(prasneetyadav.blogspot.in)
20 Sep, 2013


बहुत सुन्दर रचना .. हिंदी का सम्मान होना चाहिए और हमारे आम व्यवहार में भी इसका इस्तेमाल बढ़ना चाहिए .. ब्लॉग के लिए बधाई .. आपका मेरे ब्लॉग पर भी स्वागत है www.kavineeraj.blogspot.com
ReplyDeleteब्लॉग पर आपका बहुत बहुत स्वागत है नीरज जी,
Deleteअपने विचार साझा किए आपने ....
अल्फ़ाज़ पसंद आए ह्रदय से आभार :) :)
ब्लॉग पर आमंत्रित करने के लिए शुक्रिया :) :)
भाई प्रसनीत ...हिंदी की दुर्दशा के बारे आपके विचार काफी जायज हैं ..सच आज हिंदी में वार्तालाप शर्म और अंग्रेजी में गर्व का स्थान ले रहा है ....अंग्रेजी से हमे कोई दुश्मनी नहीं है ..इसके लाभ भी हैं ..आज विदेशों में भारतीय युवा धन को जो स्थान मिल रहा है रोजगार के मामले में उसमे अंग्रेजी के ज्ञान का भी योगदान है ...हाँ हम कितनी भी विदेशी भाषाओँ का ज्ञान प्राप्त करें और उसका लाभ भी लें ..मगर ये काम हिंदी की कब्र पर विदेशी गुलाब खिलाने वाली बात नहीं होनी चाहिए ...हिंदी का सत्कार ,आदर और इज्जत सर्वोपरी होनी ही चहिये । सबसे पहले हमे अपने बच्चों को हिंदी का ज्ञान देना ही चाहिए ..उसके बाद हमे किसी भाषा से कोई एतराज नहीं है .। ये बात कई बार उठ चुकी है कि ..हिंदी सिनेमा के कलाकार हिंदी के बल पर हिन्दुतानियों के हृदय पर राज करते हैं ..मगर उनकी आम बोल चाल की जुबान ...वही विदेशी ...। आपकी हिंदी के प्रति जागरूकता के लिए आपका धन्यवाद । ..चंदर मल्होत्रा\
ReplyDeleteचंदर भाई आपके विचार प्रसंशनीय है, भाषा कोई भी हो महत्व रखती है, अंग्रेज़ी बहुत अच्छी भाषा है बोलनी चाहिए। मगर अपनी संस्कृति को अपनाकर। बहुत बहुत शुक्रिया पोस्ट पढ़ा आपने और अपने विचार भी दिये :) :)
Deleteप्रशंसनीय प्रस्तुति
ReplyDeleteब्लॉग पर आपका स्वागत है राकेश जी हिंदी दिवस की अनेक अनेक शुभकामनाओं सहित आपका मित्र प्रसनीत .... हिंदी का मान बना रहे :)
Deleteआगे भी आते रहें ख़ुशी होगी :)
Deleteविचारणीय पंक्तियाँ ..... हमारी हिंदी का मान बना रहे .....
ReplyDeleteब्लॉग पर आपका बहुत बहुत स्वागत है मोनिका जी .... हिंदी सजती रहे संवरती रहे .... हिंदी के शब्द जेहन में उतरते रहें गीतों में ढलकर कविता बनकर .... हिंदी दिवस पर यही इच्छा है हम सबकी बहुत बहुत आभार आगे भी आते रहें ख़ुशी होगी :)
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